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मन्त्रों द्वारा यन्त्र सिध्धि
यन्त्र  मंत्र - तंत्र  तीनों का महत्त्व एक ही है जैसे सर्व प्रथम किसी देवी या देवता की मूर्ती  स्थापित करते है फिर उसे मन्त्रों द्वारा प्रतिष्ठित करते है और उसे किसी कार्य के लिए स्थापित करना है उसके लिए तांत्रिक तंत्र क्रिया ज़रूरी है. लकिन कुछ यन्त्र सरल मन्त्रों से ही सभी कार्य संपन्न कर देते है. जैसे श्रीयन्त्र गणेश यन्त्र सरस्वती यन्त्र कुबेर यन्त्र इत्यदि.
मंत्र छह प्रकार से ही मुख्य है.
  • शांति कर्म
  • वशीकरण
  • मारण
  • विद्वेषण
  • उच्चाटन
  • स्तम्भन
इनमे से सिर्फ शांति कर्म स्तम्भन उच्चाटन ही शुभ है. अन्य मंत्र साधक बुराइयों से लिप्त रहते है.
शांति कर्म
  जैसे दो दोस्त दुश्मन बन गये हों, घरेलु कलह हो किसी भी उत्पात की शांति हो सके बड़े विवाद सफलता से समाप्त हो सके.
स्तम्भन
  यह एक अच्छाई के लिए है जैसे किसी तांत्रिक ने बुराई करने के लिए कोई बुरी वास्तु छोड़ दी हो स्तम्भन करने से वो बुराई करने वाली वस्तु वही रुक जाए और जिसके लिए छोड़ी गई है उसका बचाव हो सके और सुरक्षा बनी रहे
उच्चाटन मन्त्र  
  इसलिए शुभ है जैसे कोई घर छोडकर जा चुका हो या अपनी याददाश्त खो चूका हो उस वापसी के लिए याद दिलाया जा सके.
 
उपरोक्त तीनों मंत्रो के स्वामी है
  • शांतिकर्म की स्वामी रति है इस प्रकार रति विष्णु प्रिय है इसलिए सर्वसुख दायिनी है.
  • स्तम्भन  की स्वामी लक्ष्मी
  • उच्चाटन की स्वामी दुर्गा
  1. श्री महाकाली शत्रुनाशिनी है इस प्रकार महाकाली यन्त्र, बगलामुखी यन्त्र, महाविद्या यन्त्र सिद्ध करें
  2. भैरव उपासनाके लिए शनि यन्त्र व भैरव यन्त्र सिद्ध करें
  3. मारुति यन्त्र को हमुमान जी के मन्त्रों से सिद्ध करें
  4. लक्ष्मी यन्त्र
    • श्री यन्त्र
    • महालक्ष्मी यन्त्र
    • सम्पूर्ण महालक्ष्मी यन्त्र
    • कनक धारा यन्त्र
    • कुबेर यन्त्र
    • व्यापर वृध्धि यन्त्र
    • कार्य सिध्ध यन्त्र
    • उपरोक्त सभी यन्त्र स्तम्भन की की स्वामी लक्ष्मी जी के लिए सिध्द किये जाते है. स्तम्भन का अर्थ ठहर जाना इसलिए लक्ष्मी जी का स्वागत करते है और कामना करते है कि हमारे घर में लक्ष्मी जी का वास हो और अन्न धन से घर भरा हो. लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे.
  5. विजय राज यन्त्र - इस यन्त्र को भगवती दुर्गा के मन्त्रों से मंत्रित करें. यह शक्तिशाली यन्त्र है और हर जगह विजय दिलाता है
  6. कात्यायनी यन्त्र - लग्न योग यन्त्र. यदि विवाह विलम्ब से भी ना हो पा रहा हो तो कल्याणी यन्त्र लग्न योग यन्त्र का विधि पूर्वक पूजन करें. दुर्गा के मन्त्रों द्वारा सिध्द किया जा सकता है. विवाह विलम्ब दूर हो जायेगा
  7. बीसा यन्त्र यह भगवती दुर्गा का है शत्रु नाशक रिद्धि दायक है
  8. वास्तु यन्त्र यह शांति कर्मों से सिद्ध किया जाता है. मकान के वास्तु दोष दूर करता है. इसके लिए त्रिशक्ति यन्त्र पगोणा दर्पण पिरामिड इत्यादि से भी वास्तु दोष दूर किया जा सकता है.
  9. सर्व कष्ट निवारण यन्त्र - इसे भी दुर्गा के मन्त्रों से सिद्ध किया जा सकता है. बंधन मुक्ति यन्त्र  इत्यादि इसमें सभी 13 यन्त्र  एक साथ होते है.
  10. सरस्वाति यन्त्र विद्या बुध्धि दायक सरस्वती मन्त्रों से शुद्ध करें इसके साथ बुद्ध यन्त्र - 3 मुखी रुद्राक्ष रखें उत्तम विद्या प्राप्त होगी. इसके साथ पारद शिवलिंग रखें. पारद शिवलिंग के अतिरिक्त पत्थर के शिवलिंग पूजा में रखना वर्जित है. पारद शिवलिंग पर जल इत्यादि भी नही चढ़ाया जाता.
  11. महाम्रितुन्जय यन्त्र से शिवजी के मन्त्रों से शुद्ध करें साथ ही पूजा में इसके साथ पारद शिवलिंग रखें.
  12. गायत्री यन्त्र - इसे गायत्री मन्त्रों से मंत्रित करके पूजा में रखें शुभ है
  13. पारद गणेश लक्ष्मी मूर्ती - गमेश लक्ष्मी मन्त्रों से सिद्ध करें इन पर भी जल इत्यादि चढ़ाना वर्जित है. यह शुद्ध रूप से पूजन स्थापना करने से उत्तम फल प्रदान करते है.
  14. क्रिस्टल श्रीयंत्र - यह भी पूजा में रखी जा सकती है.
 
संपर्क संबंधी जानकारी  
श्री नमः शिव शक्ति ज्योतिष रत्न (स.) मानव सनातन धर्मं सेवा समिति (रजिस्टर्ड)
पंडित दयाराम शर्मा (सेमवाल)(ज्योतिष - कर्मकांड हस्त रेखा वास्तु)
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